समाज आधारित हो आधुनिक शिक्षा
   दिनांक 01-मई-2018

गत दिनों दिल्ली के राजघाट स्थित गांधी स्मृति में विद्यालयों और महाविद्यालयों द्वारा शिक्षा में नवाचार तथा अभिनव प्रयोगों पर त्रिदिवसीय शैक्षणिक प्रदर्शनी लगाई गई। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के तत्वावधान में लगाई गई इस प्रदर्शनी का उद्घाटन राष्टÑीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वास्तविक और सार्थक शिक्षा क्या है, इसका अपने देश में विचार करना आवश्यक हो गया है। आधुनिक शिक्षा तकनीक आधारित होने के साथ ही समाज आधारित भी होनी चाहिए। शिक्षा में इसे लेकर अलग-अलग प्रयोग होने चाहिए, क्योंकि हर प्रयोग का परिणाम एक जैसा नहीं होता, मगर इन प्रयोगों की दिशा और उद्देश्य एक ही होना चाहिए। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों के लिए पर्यावरण, जल-संरक्षण, चरित्र निर्माण, वैदिक गणित आदि पर कई प्रतियोगिताएं आयोजित की गर्इं। इस आयोजन को ‘ज्ञानोत्सव’ नाम दिया गया। आयोजन में ‘शिक्षा के क्षेत्र के नवाचार’ जहां एक महत्वपूर्ण विषय रहा वहीं दूसरी तरफ भाषा का सवाल भी महत्वपूर्ण बना रहा। कहा गया कि भारतीय भाषाओं में वे सभी क्षमताएं हैं, जो न्यायिक क्षेत्र की किसी भी भाषा में होनी चाहिए। भारतीय भाषाओं को न्यायालयों में कामकाज की भाषा बनाने से जुड़ी तकनीकी एवं व्यावहारिक बाधाओं के समाधान भी खोजे जा सकते हैं। यह बात ज्ञानोत्सव के दूसरे दिन विधि क्षेत्र के विशेषज्ञों के विमर्श में उभरकर आई। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्टÑीय सचिव और भारतीय भाषा अभियान के राष्टÑीय संरक्षक श्री अतुल कोठारी ने कहा कि देश की बहुसंख्य आबादी अपनी भाषा में संवाद करती है। इसके बावजूद न्यायालयों की भाषा आज भी अंग्रेजी बनी हुई है। न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए यह जरूरी है कि लोगों को उनकी भाषा में न्याय मिले।
 
अपनी भाषा में न्यायिक प्रक्रिया चलेगी तो पारदर्शिता अधिक होगी और लोग न्यायालय के निर्णयों को बेहतर ढंग से समझ एवं आत्मसात कर पाएंगे। पर दुर्भाग्य से आजादी के सात दशक बीत जाने के बावजूद देश के उच्च न्यायालयों एवं उच्चतम न्यायालय में हिंदी में कार्यवाही नहीं होती। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषा अभियान की मांग है कि जिला सत्र न्यायालयों में लोगों को अपनी भाषा में न्याय मिलना चाहिए। इसके साथ ही उच्च न्यायालयों में भी अंग्रेजी के साथ-साथ राज्य के लोगों की भाषा में न्याय मिलने की व्यवस्था होनी चाहिए। प्रतिनिधि