नारद

नारद

क्या पक्षपात सेकुलर मीडिया का एजेंडा है!

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घटनाओं एवं खबरों को मनचाहा मोड़ दे मीडिया अपना ही नुक्सान कर रहा है। अभी हाल में राहुल गांधी ने चोरी-छिपे कुछ मुस्लिम नेताओं से मुलाकात की। ..

पत्रकारिता से गायब होती नैतिकता

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 यह कटु सच है कि सेकुलर मीडिया गैर-जिम्मेदार संस्था बन चुका है, ऐसी स्थिति में जनता और सरकार को यह जिम्मेदारी संभालनी होगी और उन्हें सही रास्ते पर लाने के लिए दबाव बनाए रखना होगा ऐसे समय में जब तथाकथित राष्ट्रीय मीडिया नए-नए बनावटी मुद्दे खड़े करने में पूरी ऊर्जा लगा रहा है, क्षेत्रीय समाचार पत्र और चैनल एक उम्मीद बनकर उभरे हैं। खासतौर पर भारतीय भाषाओं से जुड़ा मीडिया देश के मुद्दों की ज्यादा वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत कर रहा है। रांची के ‘मिशनरीज आॅफ चैरिटी’ में जब बच्चों को बेचे ..

जानते-बूझते होती है ऐसी ‘चूक’

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मीडिया का भारतीयता विरोध धीरे-धीरे अपने चरम पर पहुंचने लगा है और सेकुलर पत्रकार अपना एजेंडा साधने लगे हैं। सामयिक मुद्दों पर मीडिया के रुख और रुखाई की परतें खंगालता यह स्तंभ समर्पित है विश्व के पहले पत्रकार कहे जाने वाले देवर्षि नारद के नाम। मीडिया में वरिष्ठ पदों पर बैठे, भीतर तक की खबर रखने वाले पत्रकार इस स्तंभ के लिए अज्ञात रहकर योगदान करते हैं और इसके बदले उन्हें किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया जाता।..

फर्जी खबरों का चलन खतरनाक

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बीते कुछ समय से सेना निशाने पर है। किसी बाहरी दुश्मन के नहीं, बल्कि उस मीडिया के जो खुद को प्रगतिशील और स्वतंत्र होने का दावा करता है।..

सोशल मीडिया के युग में सच छिपाना आसान नहीं

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कुछ दिन पहले तक विजय माल्या और नीरव मोदी के भागने पर बेहद चिंतित दिखने वाले मीडिया ने अचानक आंख-कान बंद कर लिए हैं। शायद इसलिए कि देश को लूटने वालों की धर-पकड़ का काम अब कांग्रेस नेता अहमद पटेल के दरवाजे तक जा पहुंचा है। मीडिया समूहों में पटेल की हैसियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके खिलाफ मुश्किल से कोई नकारात्मक खबर छपती है। चाहे वह सत्ता में हों या सत्ता से बाहर। तमाम बड़े चैनलों, अखबारों में उनकी सिफारिश पर भर्ती पत्रकार निष्पक्षता का मुखौटा लगाकर काम कर रहे हैं। यही वजह है कि अधिकांश ..

फर्जी खबरों के जश्न में डूबा मीडिया

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फर्जी खबरों के जश्न में डूबा मीडिया..

खबर की परख में चूकती पत्रकारिता

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खबर की परख में चूकती पत्रकारिता..

पत्रकारीय स्वतंत्रता बनाम आत्मनियंत्रण

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सामयिक मुद्दों पर मीडिया के रुख और रुखाई की परतें ख्ांगालता यह स्तंभ समर्पित है विश्व के पहले पत्रकार कहे जाने वाले देवर्षि नारद के नाम। मीडिया में वरिष्ठ पदों पर बैठे, भीतर तक की खबर रखने वाले पत्रकार इस स्तंभ के लिए अज्ञात रहकर योगदान करते हैं और इसके बदले उन्हें किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया जाता।..

एजेंडे पर चलता मीडिया

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बलात्कार की घटनाएं हों या कोई दूसरा अपराध, मीडिया के एक बड़े वर्ग को इन सब में अवसर नजर आ रहा है। यह अवसर देश को बदनाम करने और उसकी छवि को धूमिल करने का है। इसी तबके ने कठुआ कांड को 'अंतरराष्ट्रीय' बनाने का काम किया। ऐसे हर मामले में पहले से तय तरीका होता है। घटना के बाद एनजीओ के जरिए आंदोलन खड़ा किया जाता है।..

कब तक परोसते रहेंगे झूठी खबरें?

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मीडिया को महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अपनी दोहरी मानसिकता बदलने की जरूरत सामयिक मुद्दों पर मीडिया के रुख और रुखाई की परतें खंगालता यह स्तंभ समर्पित है विश्व के पहले पत्रकार कहे जाने वाले देवर्षि नारद के नाम। मीडिया में वरिष्ठ पदों पर बैठे, भीतर तक की खबर रखने वाले पत्रकार इस स्तंभ के लिए अज्ञात रहकर योगदान करते हैं और इसके बदले उन्हें किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया जाता।..

खबरों में बेईमानी का खेल कब तक?

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बीते दिनों असम के 9 मुस्लिम बहुल जिलों में बलात्कार की कई घटनाएं हुईं। अधिकांश में आरोपी मुसलमान और पीडि़त अल्पसंख्यक हिंदू लड़कियां हैं। ..

चौथा स्तम्भ / नारद-दोहरे चरित्र वाले मीडिया के मठाधीश सेकुलर

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 मीडिया के मठाधीशों के कारनामे बाहर आने के साथ ही उनके दोहरे चरित्र भी सामने आ रहे हैंसामयिक मुद्दों पर मीडिया के रुख और रुखाई की परतें ख्ांगालता यह स्तंभ समर्पित है विश्व के पहले पत्रकार कहे जाने वाले देवर्षि नारद के नाम। मीडिया में वरिष्ठ पदों ..